हाँ मैं हिंदूस्तान का वो युवा हूँ, जिसकी कोई खता नहीं, क्या खबर,
क्यों हुआ पैदा, क्यों मरेगा, पता नहीं, मौत तो यहाँ बड़ी सस्ती है..२
समंदर से आके मुफ्त में बटती है। मुझे भगत सिंह की मौत दो,
हजार बार मरुँगा.. हजार बार मरुँगा..कहाँ मिलती है.. पता नहीं..पता नहीं।
जल जले तो अपने भी खून में हैं,...२ और आँखों में हैं आँधी
पर जलाने को फिरंग है यहाँ और ना बुझाने को गांधी। २ जल-जले ऐ....
मंजीलों की मुझको तलाश है, पर पता नहींऽऽऽ किस तरफ बढूँ...होऽऽऽऽऽ।
हाथ में मेरे तो तलवार है, पर पता नहीं किससे लढू...होऽऽऽऽ।
अपने भी तो दिल में सरफरोशी, और आँखों में हैं आँधी
पर जलाने को फिरंग है यहाँ और ना बुझाने को गांधी।
जल जले तो अपने भी खून में हैं,...२ और आँखों में हैं आँधी
पर जलाने को फिरंग है यहाँ और ना बुझाने को गांधी। जल-जले ऐ....
रोज घर से एसे नीकलते हैं, जैसे जा रहे हो किसी युद्ध पर
हो..मेरे माँ की आँखों में भी बस एक डर, के मैं श्याम को आउ न आउ लौटकर
हो... मैंने भी तो युँ मेरी जींदगी हैं पैरों के तले रौंदी
पर जलाने को फिरंग है यहाँ और ना बुझाने को गांधी ।
जल जले तो अपने भी खून में हैं,...२ और आँखों में हैं आँधी
पर जलाने को फिरंग है यहाँ और ना बुझाने को........... गांधी।